
हाॅ,एक बार एक friend के साथ बहस के दौरान मैंने सही बात समझने के बजाय सिर्फ अपने अहंकार में उसे हराने की कोशिश की थी। मुझे अंदर से महसूस हो रहा था कि उसके तर्क सही हैं, लेकिन सबके सामने गलत साबित न होने की जिद में मैं अपनी गलत बात पर ही अड़ी रही। इस रवैये के कारण एक अच्छी बातचीत बेकार के विवाद में बदल गई और मुझे बाद में अपनी इस गलती पर पछतावा हुआ।



















