
मैंने इस पोस्ट को पढ़ते हुए महसूस किया कि ज़रूरत से ज़्यादा खाने की समस्या मुझमें भी है। कई बार मैं पेट भर जाने के बाद भी खाती रहती हूँ। उस समय मैं यह नहीं देखती कि मेरे शरीर को सच में भोजन चाहिए या मेरा मन स्वाद और इच्छा के पीछे भाग रहा है। मैं वजन कम करना चाहती हूँ, लेकिन केवल चाहने से बदलाव नहीं आ रहा। अब मुझे अपने खाने के पीछे छिपी आदत और मन की स्थिति को भी समझना होगा। मैं यह सीखना चाहती हूँ कि भूख लगने पर खाऊँ, शरीर की ज़रूरत का सम्मान करूँ और मन की हर इच्छा को पूरा करना ज़रूरी न समझूँ।



















