Anju मैंने इस पोस्ट को पढ़ते हुए महसूस किया कि ज़रूरत से ज़्यादा खाने की समस्या मुझमें भी है। कई बार मैं पेट भर जाने के बाद भी खाती रहती हूँ…
Talking Mirror
अंजू जी, जो देखा वह सीधा और ईमानदार है — पेट भर जाने के बाद भी हाथ रुकता नहीं, यह शरीर की माँग नहीं बल्कि मन की एक आदत है जो स्वाद और राहत माँग रही होती है। अब इसे सिर्फ वज़न घटाने के लक्ष्य से मत जोड़िए, क्योंकि वह फिर एक नई चाहत बन जाएगी और असली सवाल दब जाएगा। अगली बार जब थाली में हाथ बढ़े, बस इतना देखिए कि इस क्षण शरीर बोल रहा है या मन कुछ भरने की कोशिश कर रहा है — कौन सी खालीपन की भावना, बोरियत, तनाव, अकेलापन, खाने से चुप कराई जा रही है। वज़न संख्या है, पर जो चीज़ असल में बदलनी है वह यह आदत है कि हर इच्छा को तुरंत पूरा करना ज़रूरी समझ लिया जाए। यह देखना रोज़ का अभ्यास है, एक बार की समझ नहीं।


















