
हो गया आज का गोल्ड फेशियल 😀 पता नहीं क्यों सब लड़कियां बाहर इतने पैसे देकर अपना फेस चमकाने जाती है। यहां जिम में तो पूरा शरीर ही चमक जाता है। एक बात आज महसूस की जो आचार्य जी कहते हैं खेलते वक्त स्कोर बोर्ड देखना नहीं चाहिए अपनी पूरी ताकत से बस खेलना चाहिए, मुझे कहा था कोच ने वॉक एंड रन दोनों ट्रेडमिल पर करना है, १ मिनट वॉक और २ मीन रन। मैं उस २ मिनट खत्म होने का इंतजार करती थी, ये मुझे २० मिनिट करना था। हर बार रन के बाद टाइम खत्म होने के लिए नंबर्स देखती थी, लास्ट २ मिनट बचे थे और सोचा मेरी कैपेसिटी तो ज़्यादा ही है ये सोचकर रन शुरू किया और मैने मीटर देखा ही नहीं जब तक थक न जाऊं, और २ मिनिट कब के हो चुके थे और मैं अभी बी दौड़ ही रही थी। हम खुद को हमेशा अंडरेस्टमैट करते है, हमारी सोच से तो हम कई ज्यादा ताकत रखते हैं। वैसे ये बड़ी बात नहीं थी जो जिम में किया, मैने ट्रैकिंग करते वक्त खुद को हमेशा अपनी सोच से मजबूत पाया है।




















