
आचार्य जी, 🤵मैंने 10 किलोमीटर दौड़ने का फैसला किया है। यह मेरे लिए किसी मैराथन से कम नहीं है। 12 दिसंबर को मेरी 10 किलोमीटर दौड़ है और अब मैं इसकी नियमित प्रैक्टिस के लिए भी जाती हूँ। यह करने की हिम्मत मुझे आपसे मिली है। आपके साथ जुड़ने के बाद मेरे अंदर कुछ ऊँचा करने की चाहत बढ़ी है और अपने जीवन में कुछ नया करने का बहुत अच्छा लगता है। एक समय था जब मैं इन सब चीज़ों के बारे में सोच भी नहीं सकती थी। मेरी दुनिया सिर्फ चार दीवारों के अंदर थी और जीवन दूसरों के लिए जीने में ही निकल रहा था। अपने लिए जीना क्या होता है, यह तो आपसे जुड़ने के बाद समझ में आया। आज जब मैं अपने लिए कुछ करती हूँ—खेलने जाती हूँ, स्विमिंग करती हूँ, ट्रैकिंग पर दोस्तों के साथ जाती हूँ या दौड़ने की प्रैक्टिस करती हूँ—तो कई लोगों को यह समझ नहीं आता कि मैं सिर्फ घर और बच्चों के लिए ही क्यों नहीं जीती? अपने लिए क्यों जीती हूँ? आज भी कभी-कभी ऐसा होता है कि अगर मैं दोस्तों के साथ ट्रैकिंग पर जाती हूँ, तो अपनी माँ से सच कहने में झिझक होती है और कह देती हूँ कि ऑफिस की तरफ से घूमने जा रही हूँ। क्योंकि इतने वर्षों तक अपने फैसले खुद लेने की आदत ही नहीं थी। ससुराल में भी पहले गार्डन या मार्केट जाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन आज मैं अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेती हूँ। खेलने जाना हो, स्विमिंग करनी हो या ट्रैकिंग पर जाना हो—अब मैं किसी से अनुमति लेने की जरूरत महसूस नहीं करती। आपसे मैंने यह सीखा है कि हमें अपने हक के लिए जीना है। अपने जीवन को सिर्फ दूसरों की अपेक्षाओं के हिसाब से नहीं, बल्कि अपनी समझ और अपनी खुशी के साथ भी जीना है। अगर यह समझ मुझे समय रहते नहीं मिली होती, तो शायद मेरा पूरा जीवन दूसरों के लिए जीते-जीते निकल जाता और मुझे पता भी नहीं चलता कि मैं भी बहुत कुछ कर सकती हूँ। आज मुझे सच में बहुत मज़ा आ रहा है जीने में। ऐसा लगता है कि जीना तो अब शुरू किया है। मेरे अंदर यह हिम्मत अपने जीवन को अपने तरीके से जीने की चाह जगाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, आचार्य जी। 🙏






















