
आपकी सारी बाते मुझे अपनी सी लगी जैसे मै अपनी ही कहानी पढ़ रही हूं । मैने भी अब रोज शाम को पार्क में जाकर भागना शुरू किया है । धीरे धीरे अपने चुनावों की ओर सजग हो रही हूं । आत्मनिर्भर होंने का पूरा प्रयास कर रही हूं लेकिन अभी कुछ समझ नहीं आ रहा है लेकिन मुझे जल्दी जल्दी कुछ करना है । प्रशांत सर की सीख हमें सच में नया जन्म दे रही है । सीखने की ये यात्रा चलती रहे ।



















