
🤔🤔जी यह सारी चीजे मेरे घर में होती हैं सबसे पहली बात तुम लड़की हो तो लड़कियों जैसा व्यवहार करो यानि हम लड़की को लकड़को से अलग मानता हैं 😞😞क्योंकि लड़की को मनुष्य की तरह नहीं देखा जाता उसको भोग की वस्तु बना दिया गया है यह संकीर्ण सोच है बराबर के दर्जा नहीं दिया जाता यह कोई नहीं सोचता कि एक बच्चे को जन्म देने के लिए माँ और बाप दोनों चाहिए फिर क्रेडिट भी दोनों को मिलना चाहिए। 🫴 लेकिन घर में पुरुष को श्रेष्ठ और स्त्री को हीन ही समझा जाता हालांकि बच्चे को जन्म देना फिर पालना बड़ा करने में मां का ज्यादा योगदान है अगर एक बाप को बोला जाए कि मैं बाहर जाकर काम कर लेती हूं तुम घर रहकर बच्चे को पालो तो उत्तर आता है कि यह काम तो औरतों को मिला है सबसे अजीब बात मुझे यह लगती है कि एक स्त्री ने भी मान ही लिया है कि हां बाप बच्चे को नहीं पाल सकता । 🤌 मेरा प्रश्न है कि अगर वो जन्म देने को इतना आतुर है तो फिर पाल क्यों नहीं सकता अगर पुरषो को यह जिम्मेदारी मिली होती तो आज वो इतने आतुर न होते शादी के लिए और न ही बच्चे के लिए परंतु समाज ने यह बदलाब आने ही नहीं दिया।कभी मैंने भी यह प्रश्न किया था लेकिन उत्तर मिला यह कैसे हो सकता है बाप का बच्चे को जन्मना सहज बात और पालन मुश्किल बात । 🤌🫴यह गणित मुझे समझ नहीं आया यह हिंसा है लेकिन समाज तो ऐसे ही चलता है। पुरुष लोग बाहर चले जाते हैं काम के लिए उनको क्या पता बच्चों को पालने में कितनी तकलीफ होती है। 🧐🧐 जो मैंने महसूस की है एक दूसरी स्त्री भी स्त्री की तकलीफ के साथ खड़ी नहीं होती क्योंकि उसके लिए भी यह पालना सहज है फिर क्या एक पुरुष स्त्री से पूछता है कि क्या हम एक बच्चा कर लें नहीं ऐसा नहीं होता क्योंकि पुरुष को शादी के बाद हक मिल जाता है जबरदस्ती करने का यह भी तो बलात्कार ही तो है एक तरफा। 🥹🥹 कोई पराया पुरुष ही जबरदस्ती करे तो बलात्कार नहीं होता बल्कि शादी शुदा जिन्दगियां में भी रोज बलात्कार ही चल रहा है स्त्री यह तकलीप रोज सहन करती है लेकिन स्त्री को भी सुख सुविधा का स्वार्थ लगा होता है ।



















