
बहुत सारे लोग है और मुझे बोलना है तो मैं भितर से बहुत डरी हुइ रहती हु पर बाहर से कान्फिडेंट दिखने कि कोसिस पुरी करती हु । इस डर से कि मुझे कमजोर नहि समझ ले कोइ इसलिए मैं भीतर की घबराहट दूसरों को दिखाना नहीं चाहती हु । जब ऐसा किया है उसके पिछे अक्सर रहता है दुसरो से मिलने वाला सम्मान कि चाहत



















