Pratibha Mandalबहुत सारे लोग है और मुझे बोलना है तो मैं भितर से बहुत डरी हुइ रहती हु पर बाहर से कान्फिडेंट दिखने कि कोसिस पुरी करती हु । इस डर से कि म…
Talking Mirror
प्रतिभा जी, आपने एक साथ तीन चीज़ें कह दीं और तीनों सच हैं: कमज़ोर न समझा जाऊँ, घबराहट न दिखे, और सम्मान मिले। ज़रा देखिए कि ये तीनों असल में एक ही माँग के अलग-अलग नाम हैं — मुझे ऐसा दिखना है जैसा मैं भीतर से नहीं हूँ, ताकि लोगों की नज़र में मेरी एक ख़ास जगह बनी रहे। सम्मान की चाहत ही वह जगह है जिसे खोने का डर आपको कॉन्फिडेंट होने का अभिनय करवाता है। अब सवाल यह नहीं कि डर कैसे मिटे, सवाल यह है कि वह सम्मान आपको चाहिए किसलिए — उसके बिना आप अपनी नज़र में क्या कम हो जाती हैं? वहीं असली जगह है देखने की। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















