
✍🏻 पोस्ट 13 | 9 सितंबर 26' 💭 विषय — विश्व दर्शन ───────── ❓ महात्मा बुद्ध ने लड़की को क्यों नहीं पहचाना? 🌿 कहा जाता है, महात्मा बुद्ध जंगल में बैठे थे। कुछ डाकू एक लड़की को पकड़कर ले आए थे। वह किसी तरह उनके हाथ से बचकर भाग निकली। कुछ देर बाद डाकू महात्मा बुद्ध के पास पहुँचे और पूछा, “यहाँ से कोई लड़की भागी है?” महात्मा बुद्ध ने कहा, “हाँ, कोई भागा था।” उन्होंने पूछा, “लड़की थी?” महात्मा बुद्ध ने कहा, “यह नहीं पता।” “जवान थी या बूढ़ी?” “यह भी नहीं पता।” “स्त्री थी या पुरुष?” “यह भी नहीं पता।” 👁️ अब ज़रा इस जवाब को समझिए। महात्मा बुद्ध ने यह नहीं कहा कि उन्हें कुछ दिखाई ही नहीं दिया। सामने से कोई व्यक्ति भागकर गया था, इतना उन्होंने देखा। लेकिन उन्होंने उस व्यक्ति के साथ उसकी उम्र, लिंग या देह की कोई पहचान जोड़कर उसे अपने लिए खास नहीं बनाया। यही सहजता है। 👉 लेकिन हमारे लिए देह सिर्फ़ देह नहीं रहती। किसी स्त्री को देखते ही उसकी उम्र, सुंदरता, आकर्षण और शरीर हमारे देखने का हिस्सा बनने लगते हैं। और जहाँ वासना ज़्यादा है, वहाँ स्त्री की देह उतनी ही बड़ी चीज़ बन जाती है। फिर सवाल उठता है कि स्त्री कैसी दिखे, क्या पहने, कितना शरीर दिखाई दे। लेकिन ज़रा ठहरकर पूछिए, ❓ “क्या समस्या उस स्त्री की देह में है, या मेरी नीयत में?” 📊 भारत में 2023 में महिलाओं के अपहरण और अगवा किए जाने के 88,605 मामले दर्ज हुए। उसी वर्ष बलात्कार के 29,670 मामले दर्ज हुए। ये पुलिस में दर्ज मामले हैं, घटनाओं की पूरी संख्या नहीं। इन आँकड़ों को देखकर सवाल सिर्फ़ स्त्री के कपड़ों पर क्यों जाए? 🪞 अपनी नज़र का बहीखाता कौन देखेगा? अपनी नीयत को देखना कठिन है। दूसरे के शरीर पर सवाल उठाना आसान। यही अहंकार की चाल है। अपनी कमजोरी का हिसाब किसी दूसरे के नाम लिख देना। 🌱 महात्मा बुद्ध की कहानी इसलिए सिर्फ़ स्त्री या पुरुष की कहानी नहीं है। यह देखने की कहानी है। सामने कोई व्यक्ति है। लेकिन मैं उसे क्या बना देता हूँ, यह मेरे देखने पर निर्भर करता है। ❓ जब आप किसी स्त्री को देखते हैं, तो क्या सचमुच सामने के इंसान को देखते हैं, या अपनी ही इच्छा को उसके शरीर पर लिख देते हैं? ❓ आपके हिसाब से महात्मा बुद्ध और एक सामान्य व्यक्ति के देखने में सबसे बड़ा अंतर क्या था? A. महात्मा बुद्ध के लिए सामने वाले की पहचान से ज़्यादा उसका होना महत्वपूर्ण था। B. महात्मा बुद्ध ने देह को देखा, लेकिन उसे अपनी इच्छा और वासना का विषय नहीं बनाया। C. महात्मा बुद्ध के लिए किसी व्यक्ति की उम्र, रूप और लिंग का कोई महत्व ही नहीं था। 👇 आप क्या चुनेंगे? 👇 🔗 स्रोत https://acharyaprashant.org/en/articles/shareer-va-aatma-ke-madhya-setu-hai-mann-sant-kabir-par-1_679d3e2












































