शरीर की नहीं, मन की मृत्यु से डरते हो तुम || आचार्य प्रशांत (2013)
आचार्य प्रशांत
बदलाव से ही डरता है ये निरंतर बदलता मन || आचार्य प्रशांत (2015)
आगे और करने का विचार उन्हीं को आता है जो अभी के काम में पूरे नहीं होते || आचार्य प्रशांत (2015)
दुःख सोचो तो दुःख, सुख सोचो तो भी दुःख, और आनंद सोचा नहीं जा सकता || आचार्य प्रशांत (2016)
बंधन चाहने से बंधन मिलता है और मुक्ति चाहने से भी बंधन ही मिलता है || आचार्य प्रशांत (2016)