
मैंने इस पुस्तक के पहले दो अध्याय पढ़े हैं और यह सच में आँखें खोलने वाली है। आचार्य प्रशांत लाओत्सु के वचनों की बहुत ही गहरी और व्यावहारिक व्याख्या करते हैं। अगर आप अपने मन के धोखों को समझना चाहते हैं और एक सच्ची आज़ादी की तलाश में हैं, तो यह किताब ज़रूर पढ़ें। बहुत ही सरल और प्रभावशाली!