
हम कब कह सकते हैं कि हम सफल हैं? क्या सिर्फ पैसा ही मानक है सफलता है या कुछ और है? इन बातों पर गहराई से चर्चा करती है ये किताब। हम सब सफलता का पीछा करते हैं ये जाने बिना की उसका मतलब क्या है और एक दौड़ में कूद जाते हैं। ऐसी दौड़ जो शायद हमे कभी दौड़नी ही नहीं थी। आचार्य जी ने इस विषय को पूरा खोल के रख दिया है इस किताब में। इस किताब ने मुझे सफलता का असली अर्थ समझ आया और इससे मेरे जीवन की राह पू...