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Paperback Details
HindiLanguage
190Print Length
Description
सफल होने की चाहत के पीछे, सबसे पहले, तुम्हारे मन में ये भाव बैठा होना चाहिए कि मैं अभी असफल हूँ। तुम्हारे मन में ये भाव तुम्हारे मालिक बैठाते हैं।
और कौन है तुम्हारा मालिक? हर वो व्यक्ति तुम्हारा मालिक है जिसने तुम्हारे मन में ये बात भर दी है कि तुम ‘हीन’ हो। जिन-जिन स्रोतों से तुम्हें ये संदेश आता हो, वही वो स्रोत हैं जो तुम्हें ग़ुलाम रखने में उत्सुक हैं, उनसे बचो। जो भी करो, मौज में करो।
तुम सफल हो नहीं सकते क्योंकि तुम सफल हो ही।
जानिए एक सच्चे और सफल जीवन के सूत्र आचार्य प्रशांत के साथ।
सफलता केवल सफलता प्राप्त करने की पुस्तक नहीं है, बल्कि यह समझने की पुस्तक है कि सफलता आखिर है क्या। आत्मचिंतन, जागरूकता और जीवन की गहरी समझ चाहने वाले हर व्यक्ति को यह पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए।
Kumar Gaurav
14d
To know how and why need sucess in life.
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