
मैंने ये किताब सिर्फ title देखकर उठाई थी—“जात: आज की क्या जात है?”—और honestly, ये उम्मीद से कहीं ज्यादा गहरी निकली। हम अक्सर जाति को सिर्फ एक social issue की तरह देखते हैं, लेकिन इस किताब में इसे मन की समस्या के रूप में समझाया गया है। आचार्य प्रशांत बताते हैं कि असली भेद बाहर नहीं, बल्कि हमारे अंदर बैठा हुआ है—हम खुद को और दूसरों को अलग-अलग मानते हैं, वहीं से समस्या शुरू होती है। किताब पढ़ते हुए ...

आचार्य जी से जुडने के बाद शरीर की स्थिति एक तथ्य के रूप में साफ़ साफ़ समझी। कैसे सभी इंसानों और यहाँ तक की जानवरों का शरीर भी एक सा है। ऑर्गन ट्रांसप्लांट टॉपिक से समझा कि कैसे बहुत से जानवरों के अंग मानव शरीर में भी लगाए जा चुके है। तो शरीर के हिसाब से सब एक ही है। तो चमड़े की कोई जाति नहीं होती। यस्तु ब्रह्मविद्यया ब्रह्मैव भवति — स ब्राह्मणः। जो आपको ब्रह्म में स्थापित करवा दे बस वहीं आपके ल...

This book is the need of the our to unite the country and the whole world. This book addresses the core reason behind the existence of the divide. It addresses all the issues which our country has been facing due to this divide. Its refreshing to know that our scriptures are one of the first anti caste movements ever existed. A must read for everyone.