
हीरा जनम अमोल है” एक ऐसी किताब है जो इंसान के अंदर की बेचैनी, असंतोष और आत्महीनता के मुद्दे को सीधा पकड़ती है। किताब का मुख्य फोकस यह है कि हम अपने जीवन की कीमत समझ ही नहीं पाते और बाहरी चीज़ों में उलझकर खुद को खो देते हैं। इसमें depression, comparison और identity जैसे मुद्दों को काफी सरल भाषा में समझाया गया है। मुझे इसमें यह अच्छा लगा कि यह किताब sympathy नहीं देती, बल्कि reality दिखाती है—कि हमा...