
हम सब राम के नाम पर न जाने क्या क्या नहीं करते हैं,क्योंकि हमें राम का वास्तविक अर्थ पता होता ही नहीं है। हम लोग राम को भी अपने तल पर लाकर बिठा देते हैं। जब मैंने यह किताब पढ़ी, तब मैं वास्तविक में श्री राम को जान पाई। राम तो वह है जिन्होंने सब कुछ छोड़ा है अपने पूरे जीवन में, और एक हम लोग हैं जो अपने आप को राम का भक्त बोलते हैं और सब कुछ पकड़ के रखते हैं छोड़ने की तो दूर की बात है और हमें मांग रह...