
तुलसी स्वारथ मीत सब परमारथ रघुनाथ

“हे राम!” किताब राम को सिर्फ एक धार्मिक या पौराणिक पात्र की तरह नहीं, बल्कि एक गहरी समझ और जीवन-दृष्टि के रूप में देखने की कोशिश करती है। इसमें तुलसीदास के रामचरितमानस को आधार बनाकर सवाल उठाए गए हैं—क्या राम सिर्फ पूजा करने के लिए हैं या उनसे कुछ सीखने के लिए भी? यह approach किताब को अलग बनाता है। मुझे इसमें यह अच्छा लगा कि यह blind devotion को challenge करती है और पूछती है कि अगर हम राम को मानते ...

हम सब राम के नाम पर न जाने क्या क्या नहीं करते हैं,क्योंकि हमें राम का वास्तविक अर्थ पता होता ही नहीं है। हम लोग राम को भी अपने तल पर लाकर बिठा देते हैं। जब मैंने यह किताब पढ़ी, तब मैं वास्तविक में श्री राम को जान पाई। राम तो वह है जिन्होंने सब कुछ छोड़ा है अपने पूरे जीवन में, और एक हम लोग हैं जो अपने आप को राम का भक्त बोलते हैं और सब कुछ पकड़ के रखते हैं छोड़ने की तो दूर की बात है और हमें मांग रह...