अष्टावक्र गीता में मुनि अष्टावक्र सीधे मुद्दे को हाथ लगाते है, यहां जो शिष्य है राजा जनक वो भी बहुत ही काबिल शिष्य है, उन्हें पता है जीवन दुख है इसलिए ग्रंथ की शुरुवात भी सीधे हमारी तकलीफ मूल समस्या से है।