
आज के समय में जब सही संगति, सही लक्ष्य और सही जीवन की अनदेखी कर लोग भीड़ के पीछे बेहोशी में बढे चले जा रहे हैं, उन तक होश या उन्हें खुद की ओर लाने का एक सफल प्रयास है — युध्यस्व। युध्यस्व एक आवाज है समाज में प्रचलित कुरीतियों के विरुद्ध, युध्यस्व ललकार हैं मजबूरियों के विरुद्ध, युध्यस्व संघर्ष हैं खुद के विरुद्ध। युध्यस्व मात्र एक विचार नहीं बल्कि जीवन है। जब महाभारत के मैदान में अर्जुन के पैर लड़ख...