
ताप रहित बस युद्ध हो!

There are books that give you temporary motivation, and then there are books that fundamentally shatter your illusions and rebuild your will to live. 'Yudhaswa' by Acharya Prashant is decidedly the latter. Before picking up this book, life felt like a cycle of compromise, quiet desperation, and self-pity. 'Yudhaswa' acted like an uncompromising mirror. Acharya Prashant delivers the core essence ...

युद्धस्व” एक बेहद प्रभावशाली और गहराई से सोचने पर मजबूर करने वाली पुस्तक है। यह जीवन के संघर्षों को एक नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा देती है। इस किताब को पढ़ते हुए मुझे यह समझ आया कि हम अक्सर अपनी समस्याओं का कारण बाहरी परिस्थितियों को मानते हैं, जबकि असली जड़ हमारे भीतर होती है। हमारे विचार, डर, इच्छाएँ और भ्रम ही हमारे संघर्ष को जन्म देते हैं। लेखक ने बहुत ही स्पष्ट और सरल भाषा में गहरे आध्या...

आज के समय में जब सही संगति, सही लक्ष्य और सही जीवन की अनदेखी कर लोग भीड़ के पीछे बेहोशी में बढे चले जा रहे हैं, उन तक होश या उन्हें खुद की ओर लाने का एक सफल प्रयास है — युध्यस्व। युध्यस्व एक आवाज है समाज में प्रचलित कुरीतियों के विरुद्ध, युध्यस्व ललकार हैं मजबूरियों के विरुद्ध, युध्यस्व संघर्ष हैं खुद के विरुद्ध। युध्यस्व मात्र एक विचार नहीं बल्कि जीवन है। जब महाभारत के मैदान में अर्जुन के पैर लड़ख...