
“संकल्प” जीवन को नई दृष्टि देने वाली किताब है। इसमें आचार्य प्रशांत बताते हैं कि संकल्प कोई ज़बरदस्ती करने की चीज़ नहीं है, बल्कि जब हम खुद को जान लेते हैं तो निष्काम कर्म अपने आप प्रकट होता है। यह पुस्तक हमें अपने भीतर झाँककर यह समझने में मदद करती है कि हम कौन हैं और सही दिशा में कैसे बढ़ें।