संकल्प (Sankalp)

संकल्प (Sankalp)

पहले जानो, फिर ठानो
5/5
10 Ratings & 2 Reviews
Gifting available for eBook & Audiobook Add to cart and tap ‘Send as a Gift’
Paperback Details
hindi Language
178 Print Length
Description
हम सब अपने लिए कुछ लक्ष्य बनाते हैं, और उन्हें पूरा करने के लिए अनेक संकल्प उठाते हैं। बहुत बार उन संकल्पों को पूरा करके बाहर-बाहर हम बहुत कुछ अर्जित भी कर लेते हैं, पर क्या उससे भीतर का खालीपन मिट जाता है? क्या ऐसा होता है कि जो मिला है उससे और पाने की चाहत ही खत्म हो जाए? वो चाहतें दोबारा उठें ही न?

हम एक संकल्प से दूसरे संकल्प पर दौड़ते रहते हैं लेकिन रुक कर यह नहीं पूछते कि संकल्प खुद पूरा होकर भी क्या हमें पूरा कर पा रहा है? क्या जीवन में कोई मूलभूत बदलाव आ रहा है?

आचार्य प्रशांत की यह पुस्तक संकल्प‌ लेने वाले का ध्यान बाहर से भीतर की ओर मोड़ने का प्रयास है। संकल्पकर्ता कौन है? उसके संकल्प किन लक्ष्यों के लिए लिये जा रहे हैं? वो लक्ष्य ही कहॉं से निर्धारित हो रहे हैं?

यह पुस्तक व्यक्ति को इन मूल प्रश्नों की ओर लेकर आती है जिससे कि उसके संकल्प समझ और बोध से उठें, अज्ञानता और बाहरी प्रभावों के कारण नहीं। पुस्तक के माध्यम से आचार्य जी ने सही संकल्प से जुड़ी कुछ भ्रांतियों और चुनौतियों पर भी मार्गदर्शन किया है।
Index
CH1
लक्ष्य को लेकर स्पष्टता
CH2
जीवन में अनुशासन कैसे आए?
CH3
दमन और शमन को लेकर स्पष्टता
CH4
स्पष्टता — कुछ भी करने से पहले पूछो
CH5
स्पष्टता से सही चुनाव
CH6
जीवन में सही दिशा ज़रूरी
Choose Format
Share this book
क्या आपको आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं से लाभ हुआ है? आपके योगदान से ही यह मिशन आगे बढ़ेगा।
Reader Reviews
5/5
10 Ratings & 2 Reviews
5 stars 100%
4 stars 0%
3 stars 0%
2 stars 0%
1 stars 0%