
पहले जानो, फिर ठानो

संकल्प” किताब ने मेरे लिए संकल्प और लक्ष्य को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया। पहले मैं संकल्प को केवल कुछ हासिल करने की जिद या लक्ष्य मानता था, लेकिन इस किताब ने समझाया कि अगर भीतर स्पष्टता नहीं है, तो कोई भी संकल्प हमें सही दिशा नहीं दे सकता। किताब बहुत सरल भाषा में यह स्पष्ट करती है कि हम अक्सर बिना सोचे-समझे लक्ष्य बना लेते हैं और उन्हें पाने की दौड़ में लग जाते हैं, लेकिन यह नहीं देखते कि व...

“संकल्प” जीवन को नई दृष्टि देने वाली किताब है। इसमें आचार्य प्रशांत बताते हैं कि संकल्प कोई ज़बरदस्ती करने की चीज़ नहीं है, बल्कि जब हम खुद को जान लेते हैं तो निष्काम कर्म अपने आप प्रकट होता है। यह पुस्तक हमें अपने भीतर झाँककर यह समझने में मदद करती है कि हम कौन हैं और सही दिशा में कैसे बढ़ें।