
हम सभी 'कर्म' को लेकर बहुत ही संस्य में रहते है। कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं? गलती हमारी नही है, क्योंकि हमें सिखाया ही यही गया है। कि ये करो ये मत करो! और तो और हमारे लिए कर्म कोई बहुत बड़ी चीज नही होती है। होती है तो बस पैसा कमाने का साधन! और ये कार्य को लेकर शंका हमें हमारी जीवन में दुख के रूप में देखने को मिलता हैं। फिर गलत नौकरी, गलत जीवन! और ये पुस्तक इसी भ्रम को तोड़ती है, और वास्तव म...