
“सही कर्म” किताब ने मेरे कर्म को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल दिया। पहले मैं काम को सिर्फ कमाई, जिम्मेदारी या मजबूरी के रूप में देखता था, लेकिन इस किताब ने समझाया कि कर्म का असली अर्थ इससे कहीं गहरा है। किताब बहुत सरल भाषा में यह स्पष्ट करती है कि हम जो भी करते हैं, उसका आधार हमारी सोच और समझ होती है। अगर भीतर स्पष्टता नहीं है, तो बाहरी कर्म चाहे जितने बड़े क्यों न हों, वे सही नहीं हो सकते। मुझे ख...