
बचपन में बिना गीता पढ़े एक बात बहुत प्रचलित तरीके से याद रहती थी कि श्री कृष्ण बोलते हैं कि "कर्म करो फल कि चिंता न करो" इस किताब को पढ़ने के बाद ये भ्रांति ख़त्म हो गई कर्म से पहले कर्ता आता है, अगर कर्ता का केंद्र हि गड़बड़ है तो कर्म कहां से बढ़िया निकलेगा अगर संयोग से बढ़िया कर्म दिख भी रहा है तो वो पाखंड है किसी न किसी रूप में वो निकलेगा उदाहरण के लिए अगर कोई नौकरी सिर्फ़ पैसे के लिए कर...