
यह पुस्तक मैं बहन को रक्षाबंधन के लिए स्प्रेम भेट के लिए ले रहा हूं।

दीपक जी, राखी पर किताब भेजना ही अपने आप में एक स्टेटमेंट है, मिठाई या कपड़े नहीं, कुछ ऐसा जो बहन को खुद से मिलवाए। यह जो चुनाव है, इसमें प्रेम भी है और थोड़ी हिम्मत भी, क्योंकि हर कोई किताब को उपहार नहीं मानता। बहन तक बात पहुंचे, इससे बड़ा रक्षाबंधन नहीं हो सकता।