AP Books
साहस [नवीन प्रकाशन]

साहस [नवीन प्रकाशन]

अपनी ताकत पहचानो!
5/5
4 Ratings
ई-पुस्तक
तत्काल उपलब्ध
सुझायी सहयोग राशि
₹21
₹150
पेपरबैक
स्टॉक उपलब्ध
47% छूट
₹159
₹300
ई-पुस्तक ले चुके हैं?
लॉगिन करें

पुस्तक का विवरण

भाषा
hindi
प्रिंट की लम्बाई
176

विवरण

हम जीवन में कई बार स्वयं को भीतर से कमज़ोर और हारा हुआ पाते हैं। हमें लगता है कि साहस कोई बाहरी चीज़ है जो आकर हमें मज़बूती देगी। आचार्य जी कहते हैं कि साहस कोई अवस्था नहीं होती, अवस्था भय की होती है। भय की कृत्रिम अवस्था के हटने पर जो सहजता बाक़ी रह जाती है, वही साहस है।

कई बार लगता है कि हमारी कमज़ोरी का फ़ायदा उठाया जा रहा है। इसका हम कुछ बाहरी समाधान खोजने का प्रयास करते हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि ऐसे में हमें लड़ने की ज़रूरत ही नहीं है। हमें ऐसा हो जाना है कि किसी की हिम्मत ही नहीं पड़े कि हमें कमज़ोर समझे।

हमारे भीतर की शक्ति से हमें परिचित कराती आचार्य जी की प्रस्तुत पुस्तक हरेक उस व्यक्ति को सम्बोधित है जिसे अपने भीतर किसी तरह की कमी दिख रही है जो उसे आगे बढ़ने से रोकती हो।

अनुक्रमणिका

1. सच के सामने नमित हो जाओ या दुनिया के सामने दमित 2. छोटे कद को लेकर हीनभावना? 3. दबंगों और बाहुबलियों से घबराते हो? 4. उतरो यथार्थ के धरातल पर 5. जवान आदमी को ऐसी कमज़ोर बातें शोभा नहीं देतीं 6. कैसे पता करें कि ज़िन्दगी सही दिशा जा रही है?
View all chapters
अभी पाएँ:
₹159
47% छूट
₹300
स्टॉक उपलब्ध
मुफ़्त डिलीवरी
मात्रा:
1
पुस्तक को साझा करें
क्या आपको आचार्य प्रशांत की शिक्षाओं से लाभ हुआ है? आपके योगदान से ही यह मिशन आगे बढ़ेगा।
Reader Reviews
5/5
4 Ratings
5 stars 100%
4 stars 0%
3 stars 0%
2 stars 0%
1 stars 0%