ख़ास पाठकों के लिए दो पुस्तकों का कॉम्बो भारी छूट पर! दुर्गासप्तशती सार + दुर्गासप्तशती + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन में प्रकाश लाएँ।
दुर्गासप्तशती सार:
वर्ष में दो बार धूमधाम से नवरात्रि मनाई जाती है, नौ दिन देवी पूजा होती है, पर क्या हम सचमुच इस पर्व और देवी के मर्म को समझते हैं?
श्रीदुर्गासप्तशती, जो नवरात्रि का केंद्रीय ग्रंथ है, उसमें जीवन के रहस्य को समझने के लिए अनेकों प्रतीकों का प्रयोग किया गया है — प्रकृति, पशु-पक्षी, असुर, देवता, और देवी स्वयं। ये प्रतीक हमारे जीवन में किस प्रकार सार्थक हैं? इनका आज के संदर्भ में क्या अर्थ है?
इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत बड़े ही अनूठेपन व सरलता से इन प्रतीकों का अर्थ बताते हैं और इनका आज के जीवन में उपयोग समझाते हैं।
यह पुस्तक दुर्गा सप्तशती ग्रंथ को सार रूप में आप तक लाने का एक प्रयास है।
दुर्गासप्तशती:
देशभर में नवरात्रि तो बड़े धूमधाम से मनायी जाती है, पर क्या हम इस पर्व के मर्म को समझते हैं? हम जिन दुर्गा माँ की पूजा करते हैं अर्थात् महिषासुरमर्दिनी, उनका चरित्र कहाँ से आया है? ये असुर और उनका संहार करने वाली माँ किनके प्रतीक हैं? यह असुर संहार हमारे दैनिक जीवन से कैसे संबंधित है? इन सबका उत्तर है श्रीदुर्गासप्तशती ग्रंथ।
श्रीदुर्गासप्तशती में तेरह अध्याय और सात-सौ श्लोक हैं। इनमें तीन चरित्र हैं अर्थात् तीन तरह के राक्षस जो हमारे तीन तरह के अज्ञान — दम्भ, मद और मोह के प्रतीक हैं। इन राक्षसों का संहार करने वाली देवी प्रकृति के तीन गुणों का प्रतिनिधित्व करती हैं। आचार्य जी ने तीनों चरित्रों को बड़े सरल, सुगम भाषा में विस्तृत और रोचक तरीके से समझाया है। यह पुस्तक आपको देवी उपासना के महत्व को तो बताएगी ही, साथ-ही-साथ देवी उपासना, जो केवल कर्मकांड और पाखंड से भरपूर एक हुल्लड़बाज़ी बन गयी है, उसके विपरीत आपके हृदय में माँ दुर्गा के प्रति एक सच्ची श्रद्धा जागृत करने में सहायक होगी। और आप यह समझ पाएँगे कि देवी जिन असुरों का संहार करती हैं वो और कोई नहीं बल्कि हमारी ही वृत्ति और कुत्सित वासनाएँ हैं।
ये पुस्तक हमें मां दुर्गा के भाव को समझा रही है।कैसे ये कथा हर काल के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है यह बता रही।वेदांत की कुंजी से ही किसी भी ग्रन्थ का सही अर्थ किया जा सकता है।
Nisha rajput
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Real meaning of navratri
It’s shows the real meaning of Navratri es book ko padh kr lgta h phle sirf dhong karte the real meaning toh ab pta chla h
Anand kumar Gupta
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मां दुर्गा वास्तव में है कहां अगर हम नहीं जाने तो पाखंड और कुत्सित परंपराओं में फंसे रहेंगे
दुर्गासप्तशती की भूमिका ठीक भगवतगीता के पृष्ठिभूमि जैसे ही है भगवतगीता में जहां अर्जुन घोर विषाद,संशय,निराशा,दुख से घिरे हुए स्थिति में पाए जाते है अदम्य योग्यता होते हुए भी, लगभग यही परिस्थिति मार्कण्डेय ऋषि के दुर्गा सप्तशती में भी राजा सुरथ और वणिक समाधि की होती है जिसे ऋषि द्वारा कृष्ण के भांति समझाया जाता है।
कोई भी पुस्तक क्यों पढ़ा ही जाए जब वो हमारे दुख को ना काट रही हो, दुर्गासप्तशती मे ...