
इस किताब से मुझे बहोत सी बातें समझ आयी है....कुछ मुख्य है..... 1. जब भी जीतो 'दो कप' जीतो - स्वयं से स्वतंत्रता! 2. पाखंड का जन्म - उपलब्धियों की अतिशयोक्ति 3. महापुरुषों के साथ अन्याय - आप विशेष है, तो आप ही सही काम करें !!! 4. गुरु अकेला क्या करे - सौदा तभी होगा जब दोनों पलङे बराबर हो 5. प्रेम में दूसरों के भी कर्मफल का दुख भोगा जाता है 6. त्योहार मनाने की भी पात्रता होती है 7. महत्वकांक्षा ...

5. ये मेरी स्थिति है, पर पता नहीं ये प्रेम है या मजबूरी।

आचार्य जी से जुड़ने के बाद स्वयं के नकाब उतरे लगे हैं जिससे अब खुद को और दुनिया को अधिक स्पष्टता से देखा जा सकता.... आचार्य जी की किताबें किताबें नहीं हैं. बहुमुल्य खजाना हैं.🙏