
8 साल से बदले की भावना में जल रहा था। इस पुस्तक को पढ़कर पता चला किस तरह से मैं भी खुद का ही दुश्मन बना हुआ था। आचार्य जी ने इस पुस्तक के माध्यम से मेरे जलते मन पर जैसे ठंडा पानी डाले हों। हमारे मन में जो बातें घूमते रहती हैं वे किस तरह से जीवन को प्रभावित करती हैं।

Main isko kharidne ja raha hun

बहुत अच्छे,मेरे लिए काफी उपयोगी रहा। धन्यवाद,

अभ्यंकर जी, अगर किताब के साथ फोटो भी आप का रहता तो बेहतर रहता ।