
अभी मैं इस पुस्तक को पढ़ाना शुरू ही किया है, मुझे इसमें खास बात यह लगी कि इसमें सीधे तौर पर प्रश्न किया गया है और जवाब भी बिल्कुल सीधे तौर पर ही मिलता है। जैसे इसमें पहले ही श्लोक है जनक जी बोले -- हे प्रभु ज्ञान प्राप्ति का उपाय क्या है? मेरी मुक्ति किस प्रकार होगी? वैराग्य कैसे प्राप्त होता है?आप कृपा करके मुझे बतलाइए और जवाब में अष्टावक्र जी ने कहा -- हे तात यदि तुम मुक्ति चाहते हो तो विषय...

Haa ye book sach m bahut achi hai pd kr bahut halka lgta hai mene bhi pd rhi hu .... Mai to bolugi ki ap sab bhi order kr hi lijiye

मैने भी पढ़ना शुरू किया है।