
आनन्द पढ़ते समय मुझे यह समझ आया कि हम जिस खुशी को बाहर ढूंढते रहते हैं, वह असल में हमारी समझ की कमी का परिणाम है। यह किताब बहुत सरल लेकिन गहरी तरीके से बताती है कि सुख और आनंद में क्या अंतर है। आचार्य प्रशांत ने स्पष्ट किया है कि सुख हमेशा परिस्थितियों पर निर्भर होता है, जबकि आनंद एक ऐसी स्थिति है जो भीतर से आती है। इस बात ने मेरी सोच को काफी प्रभावित किया। पढ़ते समय कई बार ऐसा लगा जैसे मेरी अपनी ...