
हम बड़ी ही ढर्राबद्ध जिंदगी जीते हैं। इसलिए हमारे सपने भी एक जैसे है और हमें मिलने वाले धोखे भी एक जैसे है। उन्हीं धोखों को ये किताब संबोधित करती है। हम हमारी नासमझी के चलते उन्हें देख ही नहीं पाते हैं और जिंदगी खराब कर लेते हैं। इन धोखों को जानने और उनसे बचने के लिए ये किताब निशाने पर लगने वाला तीर है। बहुत कम किताबें हैं जो ऐसी बात करती है।