
माया बाहर नहीं भीतर है

10 धोखे जो सब खाते हैं” पढ़ते समय सबसे ज्यादा जो चीज़ महसूस हुई, वो यह कि इसमें बताई गई बातें नई नहीं हैं—लेकिन हम इन्हें कभी गंभीरता से देखते ही नहीं। किताब में जिन “धोखों” की बात की गई है, वो कोई बाहरी ट्रिक या चाल नहीं हैं, बल्कि हमारी अपनी ही सोच, उम्मीदों और समझ की गलतियाँ हैं। यही वजह है कि ये धोखे बार-बार होते हैं, और हर बार हम हैरान रह जाते हैं। मुझे खास बात यह लगी कि यह किताब किसी को दोष ...

Pehli baar Acharya Prashant ji ki e-book padhi, aur ab lag raha hai aur bhi bahut kuch padhna bacha hai. Pehle unke videos Insta, FB, aur YouTube pe dekhne ki aadat thi, lekin book format mein unke shabdon ko padhna ek alag hi experience tha. Ye book sach mein kamaal ki thi. Thank you Acharya Ji aur Foundation ko is book ke liye. Ab agla kya padhna chahiye?

हम बड़ी ही ढर्राबद्ध जिंदगी जीते हैं। इसलिए हमारे सपने भी एक जैसे है और हमें मिलने वाले धोखे भी एक जैसे है। उन्हीं धोखों को ये किताब संबोधित करती है। हम हमारी नासमझी के चलते उन्हें देख ही नहीं पाते हैं और जिंदगी खराब कर लेते हैं। इन धोखों को जानने और उनसे बचने के लिए ये किताब निशाने पर लगने वाला तीर है। बहुत कम किताबें हैं जो ऐसी बात करती है।