
आपके लिए एक पहेली है मैं __ हूँ
इस रिक्त स्थान को भरिए। क्या आपको लगता आप जो भी इसमें भरेंगे वह सच या आपका यथार्थ हो जाएगा। संत यही समझाते हैं कि आप लगातार अपने को कुछ मानते हैं। उनमें से किसी पर भी नहीं रुकिएगा। आप जो कुछ भी भरेंगे वह गलत ही होगा।
कल में और आज में परिवर्तन होना चाहिए। कबीर साहब कह रहे हैं कि कहीं ठहरना नहीं है, न भौतिक, न मानसिक रूप से। आप एक यात्री हैं और यात्रा चलती रहनी चाहिए। आपको अपना बसेरा नहीं बना लेना है।
अष्टावक्र जी से आप पूछएंगे, मुक्ति चाहिए कब होगी वे कहते हैं अधुनैव, माने अभी। आपके और हमारे पास समय अनंत नहीं हैं। सीमित समय है इनको जल्दी पीछे नहीं छोड़ा तो इसी संसार में उलझे रहेंगे। प्रेम जितना गहरा होगा मन उतनी तेजी से मुक्ति की ओर भागेगा।
संसार यह काटन की बाड़ी, उलझ उलझ मर जाना है। तो उलझिए नहीं अभी मानें अभी ही सीख लीजिए इस भजन का अर्थ और उतार लीजिए अपने जीवन में।
Can’t find the answer you’re looking for? Reach out to our support team.
All video sessions of these video series are available on this platform only. (Some parts of few videos might be intermittently available on some social media platforms. However, the entire video series with its structure, tests, and processes is not available anywhere else other than this platform.)