Acharya Prashant (AP) Books | तेरा मेरा मनुआ कैसे एक होई रे | Tera Mera Manua Kaise Ek Hoi Re [New Release]
तेरा मेरा मनुआ कैसे एक होई रे | Tera Mera Manua Kaise Ek Hoi Re [New Release]
संत कबीर भजन श्रृंखला
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Paperback Details
HindiLanguage
132Print Length
Description
सुनने में सरल-सा लगने वाला यह भजन असल में आपके जीवन की सबसे गहरी उलझन को छूता है। क्यों मन कभी एक नहीं होता? क्यों हर रिश्ता, हर प्रयास अंततः खिंचाव और टकराव बन जाता है?
कबीर साहब के प्रसिद्ध भजन पर आधारित यह पुस्तक आचार्य प्रशांत द्वारा की गई सुसंगत वेदांतिक व्याख्या है। वे भजन को भाव और भक्ति की परतों से अलग कर उस मूल प्रश्न को सामने रखते हैं जहाँ समस्या मन की नहीं, बल्कि ‘अहंकार’ की है जो अलग बने रहने से ही जीवित रहता है।
आचार्य प्रशांत ‘मिठाई’ और ‘दवाई’ जैसे सहज और समकालीन उदाहरणों से उस भीतरी चालाकी को स्पष्ट करते हैं जिसके द्वारा अहंकार अक्सर भक्ति और प्रतीकों की आड़ में रस तो ले लेता है, पर इसके मर्म से स्वयं को सुरक्षित दूरी पर रखता है।
आपको हार्दिक आमंत्रण है, संतों का हाथ थाम लीजिए। फिर मन से उलझना नहीं पड़ता, और उस ‘मैं’ की पकड़ अपने आप ढीली पड़ने लगती है जो मन को उलझाए रखता है।
कबीर साहब के भजन 'तेरा मेरा मनुआ कैसे एक होई रे' की व्याख्या के माध्यम से आचार्य प्रशांत बताते हैं कि असली समस्या मन की नहीं, बल्कि अहंकार की है, नीयत की है। बहुत ही सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से यह पुस्तक आत्मचिंतन और आत्मबोध का मार्ग दिखाती है।
SHIVANI CHATURVEDI
3mo
Just Love
Tera Mera Manua Kaise Ek Hoi Re is far more than a commentary on a famous verse—it is an invitation to question the distance between borrowed knowledge and lived truth.
SHIVANI CHATURVEDI
3mo
Kabir sahib
It was lovely to get close with Kabir Sahab through Achrya Prashant ji teaching.