यह पुस्तक भीतर की नींद और भटकाव को साफ़-साफ़ दिखा देती है। कबीर साहब की वाणी को आचार्य जी ने बहुत सरल, गहरे और व्यावहारिक तरीके से समझाया है। “चलना है दूर मुसाफ़िर” हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जो जीवन में सच्ची दिशा और जागृति चाहता है।