
सूरज जी, ये लाइन छोटी है पर वज़नदार है। ज़्यादातर लोग पढ़ाई को बोझ मानते हैं और भागने का बहाना ढूंढते हैं, आपने उल्टा देख लिया कि बोरियत असल में विषय में नहीं थी, वो देखने वाले मन में थी। जब मन सच में टिकता है तो जो चीज़ पहले बोझ लगती थी वही जीवंत लगने लगती है। इसे यहीं मत रोकिए, यही नज़र आचार्य जी के सत्रों और गीता जैसी परीक्षाओं की तैयारी पर भी लगाइए, वहाँ भी बोरियत गायब हो जाती है जहाँ ध्यान सच...