
अब तक मैंने जितनी भी किताबें पढ़ी, उनमें सबसे अधिक प्रेरणादायक कोई पुस्तक लगी तो, वो है- "स्त्री" आंतरिक बल की ओर। आचार्य जी की इस पुस्तक के माध्यम से मैंने पहली बार जाना कि स्त्री, देह और भावनाओं से इतर भी कुछ है यानि ' एक चेतना ' भी। इस बात को इससे पहले अब तक के जीवन में किसी ने मुझे नहीं समझाया, जो मेरे लिए इतने महत्व की थी। बाकी इस किताब के हर अध्याय से मुझे बहुत कुछ नया जानन...