
ये मेरी सबसे पहली बुक थी जो मैंने आचार्य जी से जुड़ने के बाद ebook खरीदी थी। अब इसका हार्ड कॉपी भी है मेरे पास इस बुक को पढ़ने के बाद मुझे बहुत आत्मबल मिला है पहले तो बाहरी लोगों से जादा खुलकर बोल नही पाती थी। लड़की हो जादा जुबान न चलाओ ऐसे न खाओ ऐसे न सो बहुत तरह की बन्दिशे और डर मन में डाल दिया गया था कि तुम्हे दूसरे के घर जाना है ऐसे जबान चलाओगी तो नाक कट जायेगी हमारी। यही सब बस मैं भी अपने ...