
जन्माष्टमी को सही अर्थों में कैसे मनाया जाए, यह आचार्य जी ने इस पुस्तक में बहुत स्पष्टता से समझाया है। कृष्ण का जन्मदिन मनाने भर से जन्माष्टमी पूरी नहीं होती असली जन्माष्टमी तब है जब हम अपने भीतर एक नया जन्म होने दें। संकल्प लें कि जैसे अब तक अज्ञान और पुरानी आदतों में जीते आए हैं, वैसे आगे नहीं जिएँगे। कृष्ण का जन्मदिन नहीं, अपना नया जन्म मनाइए—यही जन्माष्टमी का सच्चा अर्थ है।