यह पुस्तक कृष्ण को जानने से ज़्यादा, कृष्णत्व को समझने की यात्रा है। समय, परिस्थितियाँ और पात्र बदल सकते हैं, लेकिन सत्य नहीं बदलता। श्रीकृष्ण की यही समयातीत प्रासंगिकता इस पुस्तक को विशेष बनाती है।