ये किताब, श्रीकृष्ण की उच्चतम बात को लेकर आती हैं जो समयातीत है और आज भी प्रासंगिक है। जन्माष्टमी के अवसर पर इस किताब को आपके बुकशेल्फ़ में अवश्य जोड़िये ।