
निरालम्ब उपनिषद” एक गहरी और चिंतनशील पुस्तक है, जो हमें अपने भीतर झांकने और सच्चे आत्मज्ञान की ओर ले जाती है। इस किताब को पढ़ते हुए मुझे यह एहसास हुआ कि हम अक्सर बाहरी सहारों पर निर्भर रहते हैं, जबकि वास्तविक शक्ति और स्थिरता हमारे भीतर ही मौजूद होती है। लेखक ने बहुत सरल और स्पष्ट भाषा में उपनिषद के गूढ़ विचारों को समझाया है, जिससे कठिन विषय भी आसानी से समझ में आने लगते हैं। खासकर ‘निरालम्ब’ यानी ...