
संयोग एक सनातन घर में जन्म ग्रहण करने के कारण बहुत छोटे समय में ही उपनिषदों से परिचय कराया गया था मेरा जीवन का सबसे पहले उपनिषद जिसे मैं अध्ययन शुरू किया वह था बृहद्रारण्यक उपनिषद। लेकिन कॉलेज में जाते-जाते बाजार की चक्का चांद और सोशल मीडिया से बेहोश होकर उपनिषद से दूर चला गया था आचार्य जी ने फिर से मार्ग पर लाएं। निरलम्ब उपनिषद का अध्ययन करने के बाद मेरे सारे भय पर निर्भरता दूर हो गया। मुझे असीम...

* ज्ञान भंडार * चकाचौंध * निरालंब