
हिंदी: अपनी बात, अपनी भाषा” सिर्फ भाषा की किताब नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच, हीनभावना और पहचान पर सवाल उठाती है। किताब का मुख्य point यह है कि हम अपनी ही भाषा को कमतर मानते हैं और अंग्रेज़ी को superiority से जोड़ देते हैं। यह बात काफी real लगती है, क्योंकि आज के समाज में यह साफ दिखता है। मुझे इसमें यह अच्छा लगा कि यह किताब emotional appeal के साथ-साथ practical सवाल भी उठाती है—क्या भाषा सिर्फ comm...