
इस पुस्तक में आचार्य जी ने जितनी बातें कहीं है ऐसी बातें कोई बताता भी नहीं और हम अपनी भाषा, अपने गौरव पर ही संदेह करने लग जाते हैं। आचार्य जी पूरा विस्तार से समझते हैं कि मीडिया सिनेमा सब मिलकर हमें कैसे निचा दिखने में लगे हुए हैं। और आचार्य जी ने भाषा पे आपसी विवाद को लेकर भी बात की है और उसका समाधान भी दिया है। ये किताब सभी को पढ़नी चाहिए ताकि सब अपने गौरव पर फिर से गौरव कर सकें और देश की जीडीपी...