
जीवन पर ज़रा ध्यान दीजिए! किताबें इसलिए हैं कि जब देने ही लगें ध्यान, जब आगे बढ़ने ही लगें तो अगला कदम और स्पष्ट होता जाए। पर जिसने अभी पहला ही कदम नहीं लिया, अगला कदम उसके किस काम का है? और पहला कदम है अभी, क्योंकि जीवन है अभी, सामने। और ये बात बिलकुल ठीक है, अभी यह दो लोग आए हैं अंदर (सत्र कक्ष में)। मैं इन दोनों के साथ होता हूँ, दोनों के साथ बड़ी अलग-अलग बातें होती हैं। तो मैं क्या बोल रहा हूँ, य...