
यह पुस्तक गृहस्थी का सही अर्थ समझाती है। इस पुस्तक मे बहुत ही अच्छे तरीके स बताया गया है की असली गृहस्थी बिना अध्यात्म के संभव नहीं है और ऐसा कोई घर है, जिस घर मे लोग साथ मे रह रहे है लेकिन अध्यात्म के लिए जगह नहीं है तो वो घर, घर नहीं बस ईटों के कुछ कमरे भर है और लोगो मे कोई प्रेम नहीं है वो बस स्वार्थ या संयोग से बस जुड़े है। हमें अध्यात्म को केंद्र मे रखकर गृहस्थी बसानी चाहिए, और उसी गृहस्थी मे...